शुक्रवार, 29 जून 2012

दिल का सपना जो टूट गया

खुद  को  मिटा कर ,आपको पाना  चाहता  हूँ मै , हमेशा  अपनों के ही नहीं , कभी गैरों  के भी  काम  आना  चाहता हूँ मै , अजीब धुन  है लगी हमें की मंजिल  मुझे तलाश करे , इसलिए  हर  बार  रस्ते  से  भटक जाना चाहता  हूँ मै ,  घमंड  साफ़  करो अपने  शीशे की आखो से ,ताकि साफ  साफ नजर आ सकू  आपको मै
आपका स्वाभाव  बहुत  कुछ बदला  है लेकिन , वहा नहीं  है अभी  भी जहा  लाना चाहता  हूँ मै

कलम  की कोशिश  होनी चाहिए  सत्य  लिखने की , अगर बनेगा जज्बा तो कामयाबी  मिल ही जाएगी
राह की हर बाधा स्वतः  ही मिट जाएगी , सत्य पर यकीं करो /

राहुल मिश्र

काफी समय के  बाद आप सब  के पास आ पता हूँ इसका हमें दुःख है / आज आपके लिए कुछ नया  लेकर आये है /
किन शब्दों में  इतनी कड़वी ,इतनी तीखी  बात लिखू /
शेर के संस्कार  निभाऊ  , या अपने  दिल के  हालात  लिखू , जाने  किस किस  की आखो में  देखे , हमने  अपने  लिए जहर भरे  चाकू , खुद से भी जो छुपाया  कैसे वो राज लिखू ,
दिल  से जिसको  चाह था  कैसे उसको  बदनाम  लिखू , अपने  हालात  नहीं है अच्छे तो क्यों  औरो  के जज्बात से खेलु , क्या हक  है हमको किसी को बर्बाद  लिखू

आपका

राहुल मिश्र  

गुरुवार, 14 जून 2012

एक नयी रचना

साथियों , एक नयी सुबह के  साथ  आपके बिच में 

कोशिशे  करते  रहो , कामयाबी मिलती  जाएगी ,सुबह से  चलते रहोगे  तो शाम तक  मंजिल नजर आ  ही जाएगी , प्रफूलित मन  से आगे ही बढ़ाते  रहना  कदम ,वर्ना  मंजिल दूर  होती जाएगी ,
जिन्होंने  किया है तुम्हे  परेशां ,यक़ीनन वो  भी परेशां होंगे , सब्र कर  तुझे  तो रास्ता  था मालूम  तुम निकळ  आये ,
सोचो उनका क्या होगा  ,जो खुद हर रस्ते  बंद कर  आये , मंजिले केवल  उन्हें  नजर आती  है ,जो  कदम बढ़ाते  जाते  है , 
जो पल पल  सोते  रहते  है ,वो मंजिलो से दुरी  बढ़ाते जाते  है /

राहुल मिश्र 
की दिली आवाज