खुद को मिटा कर ,आपको पाना चाहता हूँ मै , हमेशा अपनों के ही नहीं , कभी गैरों के भी काम आना चाहता हूँ मै , अजीब धुन है लगी हमें की मंजिल मुझे तलाश करे , इसलिए हर बार रस्ते से भटक जाना चाहता हूँ मै , घमंड साफ़ करो अपने शीशे की आखो से ,ताकि साफ साफ नजर आ सकू आपको मै
आपका स्वाभाव बहुत कुछ बदला है लेकिन , वहा नहीं है अभी भी जहा लाना चाहता हूँ मै
कलम की कोशिश होनी चाहिए सत्य लिखने की , अगर बनेगा जज्बा तो कामयाबी मिल ही जाएगी
राह की हर बाधा स्वतः ही मिट जाएगी , सत्य पर यकीं करो /
राहुल मिश्र
आपका स्वाभाव बहुत कुछ बदला है लेकिन , वहा नहीं है अभी भी जहा लाना चाहता हूँ मै
कलम की कोशिश होनी चाहिए सत्य लिखने की , अगर बनेगा जज्बा तो कामयाबी मिल ही जाएगी
राह की हर बाधा स्वतः ही मिट जाएगी , सत्य पर यकीं करो /
राहुल मिश्र