PAYAR KA EK AAISHA AFSANA JO PYAR KE PICHE BHAGTA RAHA PAR PYAR USE DUTKARTA RAHA EK INSAN KA DARDA PESH KAR RAHA HOO EN RACHNAWO KE JARIYE
सोमवार, 30 नवंबर 2009
दिल के दर्द
प्यार किया किसी ने ठुकरा दिया पर किस्मत में जो लिखा है उतना मिला जरुर है शुक्रिया है उस
ईश्वर का जिसने हमें उन लाखो लोगो से बेहतर बनाया जो बेचारे आनाथ है बेसहारा है , अपंग है
जिन सर पर कोई सहारा नही है / इसके लिए ईश्वर तेरा मै धन्यवाद् देता हूँ /
' आखो के दिए दिए यू ही नही जला किए कुछ दिल के घाव थे जो दिल में ही पला किए
इस जिंदगी के होढ तो ठंडे भी हो गए एक हम है जो तेरी चाह मे हर पल जला किए
धोखा दिया है आप ने ये ठीक है मगर हम भी तो अपने आपको अब तक छला किए
जिन लोगो के लिए ख़ुद को लुटा दिया हज़ार बार आइसे दोस्तों की आख मे हम कितना खला किए /
राहुल मिश्रा की कलम से
किसी खास को समर्पित
तेरे मेरे बीच
हम ख़ुद के गम में डूबे रहे इस कदर की अकेलेपन से रिश्ता जोड़ ले तो अच्छा है
दुनिया की नज़रो में हम आए ना कभी सिलसिला सपनो में मोड़ ले तो अच्छा है
जितनी शिकायत" आपको करना है मुझसे अगर एक दुसरे से मिलकर करले तो अच्छा है "
राहुल मिश्रा
हमें लिखना ना भूले /
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नयी सदी पर
" नयी सदी है मगर लोग तो पुराने है , सभल सभल के हमें फासले मिटाने है /
कही नमाज तो कही शंख भी है हवावो में हमें पता है ईश्वर के कई ठिकाने है
उजाले सिर्फ बड़ी घरो की अमानत न बने , कुछ इस तरह से हमें अब दिए जलाने है /
ना पसंद आई हमें दोस्ती पडोसी की , हमें तो अपने हर सफ़र के निशान मिटाने है /
आप की ख्याल के जुगनू तलाश करता हूँ ,सुनहरी रात के मुझे अहसान नहीं उठाने है
हर एक साल में हम केवल गले ही मिलते रहे , नए साल में अब हमें दिल से दिल मिलाने है /
राहुल मिश्र की कलम से
हमेशा की तरह आप की बेबाक राय के इंतजार में
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शनिवार, 28 नवंबर 2009
दिल का दर्द जब आखो से बाया होगा
" तेरे मेरे बीच कुछ फासले रहे तो अच्छा है , यदि ख़ामोशी की चादरे ओढ़ ले तो अच्छा है
हम ख़ुद के गम में डूबे रहे इस कदर की तन हाई से रिश्ता जोड़ ले तो अच्छा है
दुनिया की नज़र में हम आए न कभी सिलसिला सपनो में मोड़ ले तो अच्छा है
जितनी शिकायत तुम्हे करनी है मुझसे यदि एक दुसरे के पास आ जाए तो अच्छा है "
किसी को भूलना आसान नही होता और खास कर तब जिसे आप शिदत से चाहते हो जब वही
शक्स आप को शक की नज़र से देखगे तो आप ख़ुद सोचो आपके दिल पर क्या बीतेगी जब अपना
कोई आप को बुरा बोलता है मै जनता हूँ वो भी जो बोलते है वो दिल से नही बोलते पर पैसे की
हनक उन्हें इन्सान को भुलाने को मजबूर कर देती है /
राहुल मिश्रा की कलम से
आप के सहयोग की जरुरत है हमें अपनी राय जरुर दे
rahul.mishra2009@indiatimes.com
मेरे दिल की बात
मेरे तो दर्द भी औरो के काम आते है / मै रो पडू तो कई लोग मुस्कराते है
ईश्वर ही जाने वो कैसे सुकून पाते है / जो लोग दिलो के खेल में हार जाते है
कोई तो है जो ईमानदारी से है काम लेता किसी को ऐअब हमारे नज़र तो आते है
घमंड चले आए घरो से कब्रों तक अब यहाँ भी नाम के पत्थर लगाये जाते है
उजड़ते आखो में सपनो की फसल मत बोना / क्योकि बंजर जमीं में पौधे नही लगाते है
बहुत घमंड है उन्हें अपनी बुलंदी पर उन्हें बतावो की सितारे भी अक्सर टूट जाते है
राहुल मिश्रा की कलम से
कृपया अपनी बेबाक राय जरुर दे /