शनिवार, 19 दिसंबर 2009

प्यार की गहराई मत जानो

गम तो हर दिल में होते है पर जो गम दिल को भूल कर अपनी यादो को समेट लेते है वो वास्तव में

एक नया फ़साना बना देते है / गीत और गजल तो शब्दों की तुक बंदी है पर उसके भाव उसकी अहमियत

को बता देते है / कोई हमसे जब जानना चाहता है प्यार के बारे में हम सर झुका कर बस अदब से मुस्कराते है /क्योकि प्यार को यदि बया कर पाता कोई तो आज प्यार किसी का अधूरा नहीं होता ?

इसलिए दोस्तों किसी से उसके प्यार की गहरे मत जानो

राहुल मिश्र

सोमवार, 30 नवंबर 2009

दिल के दर्द

जब दिल में कोई दर्द होता है तो ऐसा लगता है जैसे अब अपना कोई नही है किसी ने हमें
प्यार किया किसी ने ठुकरा दिया पर किस्मत में जो लिखा है उतना मिला जरुर है शुक्रिया है उस
ईश्वर का जिसने हमें उन लाखो लोगो से बेहतर बनाया जो बेचारे आनाथ है बेसहारा है , अपंग है
जिन सर पर कोई सहारा नही है / इसके लिए ईश्वर तेरा मै धन्यवाद् देता हूँ /

' आखो के दिए दिए यू ही नही जला किए कुछ दिल के घाव थे जो दिल में ही पला किए
इस जिंदगी के होढ तो ठंडे भी हो गए एक हम है जो तेरी चाह मे हर पल जला किए
धोखा दिया है आप ने ये ठीक है मगर हम भी तो अपने आपको अब तक छला किए
जिन लोगो के लिए ख़ुद को लुटा दिया हज़ार बार आइसे दोस्तों की आख मे हम कितना खला किए /

राहुल मिश्रा की कलम से
किसी खास को समर्पित

तेरे मेरे बीच

" आपके और मेरे बीच कुछ फासले रहे तो अच्छा है ,यदि हम ख़ामोशी की चादर ओढ़ ले तो अच्छा है
हम ख़ुद के गम में डूबे रहे इस कदर की अकेलेपन से रिश्ता जोड़ ले तो अच्छा है
दुनिया की नज़रो में हम आए ना कभी सिलसिला सपनो में मोड़ ले तो अच्छा है
जितनी शिकायत" आपको करना है मुझसे अगर एक दुसरे से मिलकर करले तो अच्छा है "

राहुल मिश्रा
हमें लिखना ना भूले /
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नयी सदी पर

दोस्तों कुछ नयी पक्ति के साथ एक बार फिर हाज़िर हूँ आपके पास

" नयी सदी है मगर लोग तो पुराने है , सभल सभल के हमें फासले मिटाने है /
कही नमाज तो कही शंख भी है हवावो में हमें पता है ईश्वर के कई ठिकाने है
उजाले सिर्फ बड़ी घरो की अमानत न बने , कुछ इस तरह से हमें अब दिए जलाने है /
ना पसंद आई हमें दोस्ती पडोसी की , हमें तो अपने हर सफ़र के निशान मिटाने है /
आप की ख्याल के जुगनू तलाश करता हूँ ,सुनहरी रात के मुझे अहसान नहीं उठाने है
हर एक साल में हम केवल गले ही मिलते रहे , नए साल में अब हमें दिल से दिल मिलाने है /

राहुल मिश्र की कलम से
हमेशा की तरह आप की बेबाक राय के इंतजार में
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शनिवार, 28 नवंबर 2009

दिल का दर्द जब आखो से बाया होगा

" तेरे मेरे बीच कुछ फासले रहे तो अच्छा है , यदि ख़ामोशी की चादरे ओढ़ ले तो अच्छा है

हम ख़ुद के गम में डूबे रहे इस कदर की तन हाई से रिश्ता जोड़ ले तो अच्छा है

दुनिया की नज़र में हम आए न कभी सिलसिला सपनो में मोड़ ले तो अच्छा है

जितनी शिकायत तुम्हे करनी है मुझसे यदि एक दुसरे के पास आ जाए तो अच्छा है "

किसी को भूलना आसान नही होता और खास कर तब जिसे आप शिदत से चाहते हो जब वही

शक्स आप को शक की नज़र से देखगे तो आप ख़ुद सोचो आपके दिल पर क्या बीतेगी जब अपना

कोई आप को बुरा बोलता है मै जनता हूँ वो भी जो बोलते है वो दिल से नही बोलते पर पैसे की

हनक उन्हें इन्सान को भुलाने को मजबूर कर देती है /

राहुल मिश्रा की कलम से

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मेरे दिल की बात

मेरे तो दर्द भी औरो के काम आते है / मै रो पडू तो कई लोग मुस्कराते है

ईश्वर ही जाने वो कैसे सुकून पाते है / जो लोग दिलो के खेल में हार जाते है

कोई तो है जो ईमानदारी से है काम लेता किसी को ऐअब हमारे नज़र तो आते है

घमंड चले आए घरो से कब्रों तक अब यहाँ भी नाम के पत्थर लगाये जाते है

उजड़ते आखो में सपनो की फसल मत बोना / क्योकि बंजर जमीं में पौधे नही लगाते है

बहुत घमंड है उन्हें अपनी बुलंदी पर उन्हें बतावो की सितारे भी अक्सर टूट जाते है

राहुल मिश्रा की कलम से

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बुधवार, 25 नवंबर 2009

राहुल मिश्रा की कलम से

प्रिय दोस्तों
आपके पास एक बार हाज़िर हूँ मै राहुल मिश्रा