साथियों , एक नयी सुबह के साथ आपके बिच में
कोशिशे करते रहो , कामयाबी मिलती जाएगी ,सुबह से चलते रहोगे तो शाम तक मंजिल नजर आ ही जाएगी , प्रफूलित मन से आगे ही बढ़ाते रहना कदम ,वर्ना मंजिल दूर होती जाएगी ,
जिन्होंने किया है तुम्हे परेशां ,यक़ीनन वो भी परेशां होंगे , सब्र कर तुझे तो रास्ता था मालूम तुम निकळ आये ,
सोचो उनका क्या होगा ,जो खुद हर रस्ते बंद कर आये , मंजिले केवल उन्हें नजर आती है ,जो कदम बढ़ाते जाते है ,
जो पल पल सोते रहते है ,वो मंजिलो से दुरी बढ़ाते जाते है /
राहुल मिश्र
की दिली आवाज
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