गुरुवार, 14 जून 2012

एक नयी रचना

साथियों , एक नयी सुबह के  साथ  आपके बिच में 

कोशिशे  करते  रहो , कामयाबी मिलती  जाएगी ,सुबह से  चलते रहोगे  तो शाम तक  मंजिल नजर आ  ही जाएगी , प्रफूलित मन  से आगे ही बढ़ाते  रहना  कदम ,वर्ना  मंजिल दूर  होती जाएगी ,
जिन्होंने  किया है तुम्हे  परेशां ,यक़ीनन वो  भी परेशां होंगे , सब्र कर  तुझे  तो रास्ता  था मालूम  तुम निकळ  आये ,
सोचो उनका क्या होगा  ,जो खुद हर रस्ते  बंद कर  आये , मंजिले केवल  उन्हें  नजर आती  है ,जो  कदम बढ़ाते  जाते  है , 
जो पल पल  सोते  रहते  है ,वो मंजिलो से दुरी  बढ़ाते जाते  है /

राहुल मिश्र 
की दिली आवाज 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें