अक्स फितरत ने जो उभारे है
कुछ शिकायते है तो कुछ इशारे है
हमसे पूछो बहारो के जलवे ये दोस्त हमने तो तंगहाली में दिन गुजारे है /
तुम ज़माने के हो हमारे सिवा ,
हम किसी के नहीं बस तुम्हारे है /
हमसे जिन्दा थी जिंदगी कल तक ,
पर आज तो हम ही जिंदगी के मारे है /
जब नज़ारे न थे तब निगाहे वहा थी
अब निगाहे नहीं बस नज़ारे है ,
जिनको आसू समझ रहे हो आप
वो तो दिल के टूटे हुए सहारे है /
राहुल मिश्र
आपके विचारो का हमें इंतजार रहेगा /
rahulmishra3@in.com
rahul.mishra2009@indiatimes.com
PAYAR KA EK AAISHA AFSANA JO PYAR KE PICHE BHAGTA RAHA PAR PYAR USE DUTKARTA RAHA EK INSAN KA DARDA PESH KAR RAHA HOO EN RACHNAWO KE JARIYE
सोमवार, 8 फ़रवरी 2010
कोई ठिकाना तो है नहीं
नदियों को कही बहना तो है नहीं
कहता है जल की मेरा तो ठिकाना है नहीं
अब कह दिया तो साथ निभाएंगे उम्र भर
हलाकि दोस्ती का अब जमाना तो है नहीं
थोड़ी सी आत्मविश्वास की रोशनी इसे जो भी लूट ले
वैसे भी मेरे पास कोई खजाना तो है नहीं
चुभ जाये जाने किसे ये बाते हमारी , पर अपना तो कोई खास निशाना है नहीं
राहुल मिश्र
आप हमें मेल करना न भूले अपने विचार
rahulmishra3@in.com
rahul.mishra2009@indiatimes.com
कहता है जल की मेरा तो ठिकाना है नहीं
अब कह दिया तो साथ निभाएंगे उम्र भर
हलाकि दोस्ती का अब जमाना तो है नहीं
थोड़ी सी आत्मविश्वास की रोशनी इसे जो भी लूट ले
वैसे भी मेरे पास कोई खजाना तो है नहीं
चुभ जाये जाने किसे ये बाते हमारी , पर अपना तो कोई खास निशाना है नहीं
राहुल मिश्र
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