मेरे तो दर्द भी औरो के काम आते है / मै रो पडू तो कई लोग मुस्कराते है
ईश्वर ही जाने वो कैसे सुकून पाते है / जो लोग दिलो के खेल में हार जाते है
कोई तो है जो ईमानदारी से है काम लेता किसी को ऐअब हमारे नज़र तो आते है
घमंड चले आए घरो से कब्रों तक अब यहाँ भी नाम के पत्थर लगाये जाते है
उजड़ते आखो में सपनो की फसल मत बोना / क्योकि बंजर जमीं में पौधे नही लगाते है
बहुत घमंड है उन्हें अपनी बुलंदी पर उन्हें बतावो की सितारे भी अक्सर टूट जाते है
राहुल मिश्रा की कलम से
कृपया अपनी बेबाक राय जरुर दे /
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