अक्स फितरत ने जो उभारे है
कुछ शिकायते है तो कुछ इशारे है
हमसे पूछो बहारो के जलवे ये दोस्त हमने तो तंगहाली में दिन गुजारे है /
तुम ज़माने के हो हमारे सिवा ,
हम किसी के नहीं बस तुम्हारे है /
हमसे जिन्दा थी जिंदगी कल तक ,
पर आज तो हम ही जिंदगी के मारे है /
जब नज़ारे न थे तब निगाहे वहा थी
अब निगाहे नहीं बस नज़ारे है ,
जिनको आसू समझ रहे हो आप
वो तो दिल के टूटे हुए सहारे है /
राहुल मिश्र
आपके विचारो का हमें इंतजार रहेगा /
rahulmishra3@in.com
rahul.mishra2009@indiatimes.com
अक्स फितरत ने जो उभारे है
जवाब देंहटाएंकुछ शिकायते है तो कुछ इशारे है
हमसे पूछो बहारो के जलवे ये दोस्त हमने तो तंगहाली में दिन गुजारे है..
Bahut khoob!
jai hind jai bharat
जवाब देंहटाएंअच्छी लगी आपकी रचना .. इस नए चिट्ठे के साथ हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
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