सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

कोई ठिकाना तो है नहीं

नदियों को कही बहना तो है नहीं
कहता है जल की मेरा तो ठिकाना है नहीं
अब कह दिया तो साथ निभाएंगे उम्र भर
हलाकि दोस्ती का अब जमाना तो है नहीं
थोड़ी सी आत्मविश्वास की रोशनी इसे जो भी लूट ले
वैसे भी मेरे पास कोई खजाना तो है नहीं
चुभ जाये जाने किसे ये बाते हमारी , पर अपना तो कोई खास निशाना है नहीं

राहुल मिश्र
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