सोमवार, 17 मई 2010

इल्जाम

सपना मेरा बिखर ना जाये कही , झोली काटो से भर ना जाये कही

टूट जाये ना सपना चाहत का , मेरा नशा उतर न जाये कही

उलझाने इतनी पाल राखी है , दर्द दिल में न फ़ैल जाये कही

इतने अपनेपन से मत देखो ,कही जिंदगी गुजर न जाये मेरी

खा रही है ये फिक्र दुनिया को , मेरी दुनिया स्वर न जाये कही

ये आपके होतो की ख़ामोशी ,आप पर इल्जाम लगा न जाये कही

राहुल मिश्र

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